दिवाली मिलन: राहुल गांधी की एक बार पुन: राजनीति में हिंदू पहचान की तलाश!!
इफ्तार में शामिल होना या दिवाली मनाना किसी भी नेता का व्यक्तिगत और सामाजिक अधिकार है। सवाल तब उठता है, जब धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों की सक्रियता राजनीतिक परिस्थितियों के साथ बदलती दिखाई देती है।
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